Bumper Guard Ban: गाड़ी में Bullbar लगाने पर सरकार ने लगाया बैन

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crash guardभारत सरकार ने गाडिय़ों में लगने वाले Bumper Guard Ban कर दिया है। Bumper Guard को बुलबार या क्रेश गार्ड भी कहा जाता है। सडक़ परिवहन मंत्रालय ने राज्यों को जारी सर्कुलर में बम्पर गार्ड के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने को कहा है साथ ही यह भी कहा है कि बम्पर गार्ड मोटर वेहीकल एक्ट 1988 के सैक्शन 52 का खुला उल्लंघन है।

जुलाई में दिल्ली हाईकोर्ट में पैसेंजर और पैदल यात्रियों के लिये खतरनाक बताते हुये Bumper Guard Ban करने की मांग करते हुये एक पीआईएल यानी जनहित याचिका भी लगाई गई थी। इस याचिका पर सुनवाई करते हुये जस्टिस गीता मित्तल और जस्टिस सी हरि शंकर ने सडक़ परिवहन मंत्रालय और बीमा नियामक प्राधिकारण आईआरडीए को नोटिस जारी करते हुये पक्ष रखने को कहा था।

कारों खासकर एसयूवी में बम्पर गार्ड लगाने का बहुत चलन है और आमतौर पर गाड़ी को माचो, बोल्ड व स्पोर्टी लुक देने के लिये लगाया जाता है। साथ ही एक मकसद एक्सीडेंट की स्थिति में गाड़ी के इंजन व अन्य अहम हिस्सों को नुकसान से बचाना भी होता है।

Bumper Guard Ban करने के पीछे सरकार का तर्क है कि मेटल के बने बुलबार आदि एक्सीडेंट की स्थिति में पैदल यात्रियों के साथ ही पैसेंजर के लिये भी घातक साबित हो सकते हैं।

जबकि कम्पनियां स्टेन्डर्ड फिटमेंट के तौर पर प्लास्टिक बम्पर का ही इस्तेमाल करती हैं जो ना केवल क्रम्पल ज़ोन की तरह काम करते हुये एक्सीडेंट के झटके को कम करते हैं बल्कि सडक़ पर चल रहे पैदल यात्रियों को भी चोट नहीं पहुंचाते। तेज स्पीड पर एक्सीडेंट की स्थिति में Bumper Guard पैसेंजर के लिये जान जाने या गंभीर चोट का खतरा पैदा कर सकते हैं।

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि पैसेंजर गाडिय़ों में एअरबैग सेंसर फ्रंट में ही लगे होते हैं लेकिन Bumper Guard के चलते सेंसर सही तरह से काम नहीं कर पाते और इस तरह एक्सीडेंट की स्थिति में एअरबैग के खुलने में देर हो सकती है या हो सकता है एअरबैग खुले ही नहीं।

कार कम्पनियां बम्पर को डिजायन करने में इस बात का खास ख्याल रखती हैं कि एक्सीडेंट की स्थिति में पैदल यात्री को चोट न लगे और इनका मैटीरियल भी सॉफ्ट होता है लेकिन हार्ड मेटल के बीम से बने बम्परगार्ड लगाने कार कम्पनियों का बम्पर डिजायनिंग का मकसद ही बेकार हो जाता है।

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