रिकवरी ट्रेक पर लौटेगी गाडियों की बिक्री

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ग्राफिक्स में टॉप-8 कार कम्पनियों की जून की परफॉर्मेन्स दिखाई गई है। जून में टाटा और जीएम बड़े घाटे में रहीं। टाटा शायद जुलाई में ही ज़ेस्ट और बोल्ट को लॉन्च कर देगी इसलिये स्टॉक इन हैंड को निपटाने में लगी है। इसलिये डिस्पैच कम हुये जो इस टेबल में नजर आ रहे हैं। पिछले वर्ष हुये बड़े रीकॉल और फिर सेल, युवा और एंजॉय के उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाने का असर बिक्री और कम्पनी के सेंटिमेंट पर साफ नजर आ रहा है। होन्डा को अमेज़ की रिकवरी और सिटी के ड्रीम रन का फायदा जून में भी मिला है। एक्सेंट और ग्रांड हुंडई को थामे रखने में कामयाब हैं। मार्च की हड़ताल के बाद टोयोटा ने पिछले तीन महिनों में डिस्पैच बढ़ाये हैं। इसके अलावा ईटिओस क्रॉस और नई कोरोला से भी 1500 यूनिट्स का जून में फायदा हुआ है। फोर्ड की निर्भरता ईकोस्पोर्ट पर महिने-दर-महिने बढ़ती जा रही है। निसान का जिक्र इस ग्राफिक्स में नहीं है लेकिन कम्पनी जून में 1 हजार के करीब ही डेटसन गो बेच पाई। यानि डेटसन से भी निसान की उम्मीदें पूरी होती नहीं दिख रही हैं।
मारुति की जून सेल्स में जो 31 फीसदी का उछाल नजर आ रहा है उसका बड़ा कारण मिनी सैगमेंट है। ऑल्टो, वैगन-आर वाले मिनी सैगमेंट में जून में कम्पनी की बिक्री 52 फीसदी बढ़ी है। इस सैगमेंट के ज्यादातर ग्राहक फस्र्ट टाइम कार बायर होते हैं यानि कह सकते हैं कि लम्बे इंतजार के बाद इन ग्राहकों की बाजार में वापसी हो रही है। यदि मारुति के मिनी सैगमेंट में बिक्री बढऩे को एक टे्रंड माना जाये तो लगता है कि ऑटो मार्केट में अब रिकवरी की शुरुआत हो रही है।
ज़ाईफिन रिसर्च ने वेहीकल परचेज़ सेंटिमेंट इंडेक्स के नाम से एक रिपोर्ट रिलीज की है। इसके अनुसार लगातार दूसरे महिने यानि मई के बाद जून में भी इंडेक्स रिकवरी दिखा रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले महिनों में दक्षिण भारत के बाजारों में डिमांड और सेल्स तेजी से बढ़ेगी। दक्षिण के पांच राज्यों के लिये परचेज़ सेंटिमेंट इंडेक्स 17.4 है जबकि पश्चिमी के लिये 14.6, पूर्व के राज्यों के लिये 13 और उत्तर के राज्यों के लिये 13.7 है। पढिय़े पूरी रिपोर्ट
ज़ाईफिन का आंकलन है कि मेट्रो, टियर1 और टियर2 में से बिक्री बढऩे की सबसे ज्यादा संभावना टियर2 शहरों में है। टियर2 शहरों के लिये 50 के बेंचमार्क पर वेहीकल परचेज़ सेंटिमेंट इंडेक्स 18.8 है। जबकि मेट्रो शहरों के लिये 17.2 व टियर1 शहरों के लिये 9.1। मेट्रो शहरों में परचेजिंग सेंटिमेंट के लिहाज से 50.6 इंडेक्स के साथ मुम्बई में बिक्री सबसे ज्यादा बढऩे की संभावना है। जबकि सबसे कमजोर संभावना 1.2 के साथ कोलकाता में है।

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