मारुति की 69 हजार स्विफ्ट, डिज़ायर और रिट्ज रीकॉल

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Maruti-Suzuki-Recall-carमारुति सुजुकी ने 69555 कारों को रीकॉल करने की घोषणा की है। कम्पनी ने कहा है कि 8 मार्च 2010 से 11 अगस्त 2013 के बीच बनी स्विफ्ट, डिज़ायर और रिट्ज कारों के एक बैच को रीकॉल किया जा रहा है। इन कारों की वायरिंग हारनैस की फिटिंग की जांच की जायेगी और जरूरत होने पर उसकी मरम्मत की जायेगी। इस रीकॉल के दायरे में 55938 पुरानी डिज़ायर, 12486 पुरानी स्विफ्ट और 1131 रिट्ज कारें शामिल हैं। कम्पनी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि यह रीकॉल सिर्फ इस अवधि में बने इन मॉडलों के डीजल वैरियेंटों पर ही लागू है और इसके दायरे में घरेलू व निर्यात बाजार का कोई अन्य मॉडल शामिल नहीं है।
कम्पनी के डीलर अपनी ओर से प्रभावित ग्राहकों से सम्पर्क कर रिपेयर करेंगे और इसके लिये ग्राहकों को कोई पैसा नहीं देना होगा।
कम्पनी ने इस रीकॉल के सम्बंध में अपनी वेबसाइट पर एक लिंक भी लोड किया है जिसमें गाड़ी का चैसिस नम्बर लिखकर ग्राहक यह पता लगा सकते हैं कि उनकी गाड़ी इस रीकॉल के दायरे में आ रही है या नहीं।
यह मारुति का इस वर्ष का दूसरा बड़ा रीकॉल है। कम्पनी ने अप्रेल में भी 113311 कारों को रीकॉल किया था। इस रीकॉल में अर्टीगा, डिज़ायर और स्विफ्ट के 12 नवम्बर 2013 से 2 फरवरी 2014 के बीच बने मॉडल शामिल किये गये थे। इन कारों की फ्यूल फिलर नैक में मामूली गड़बड़ थी। फ्यूल फिलर नैक दरअसल फ्यूल इनलेट को फ्यूल टेंक से जोडऩे वाली ट्यूब को कहते हैं।
पिछले वर्ष सियाम द्वारा लागू की गई वॉलेंटरी रीकॉल पॉलिसी के बाद से देश में कार कम्पनियों द्वारा अपने मॉडलों को रीकॉल करने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इसे कम्पनी की क्वॉलिटी पॉलिसी से भी जोडक़र देखा जा सकता है। पिछले वर्ष ही जनरल मोटर्स का टवेरा के इंजन और बॉडी वेट के सर्टिफिकेशन में गड़बड़ी का बड़ा मामला सामने आने के बाद से कम्पनियां रीकॉल को लेकर पहले से ज्यादा सतर्क हो गई हैं। जनरल मोटर्स को पिछले वर्ष 1.14 लाख टवेरा को रीकॉल करना पड़ा था। इन गाडिय़ों में जांच के लिये सर्टिफाइड इंजन लगाये जा रहे थे जबकि बाजार में जो गाडिय़ां बिकने जा रही थी उनमें लगे इंजन उत्सर्जन मानकों पर खरे नहीं थे। इस मामले में कम्पनी के कई बड़े अधिकारी दोषी पाये गये थे जिन्हें बर्खास्त किया गया था।
भारत सरकार इन दिनों मैंडेटरी यानि अनिवार्य रीकॉल पॉलिसी पर काम कर रही है। इसके लिये नेशनल ऑटोमोटिव बोर्ड का गठन किया जा रहा है जो मैन्यूफैक्चरिंग डिफेक्ट और ग्राहकों की शिकायतों पर नजर रखेगा और कोई मामला सामने आने पर कम्पनी को प्रभावित मॉडल को रीकॉल करने का निर्देश दे सकेगा। यह बोर्ड रीकॉल की जा रही गाडिय़ों की संख्या के हिसाब से कम्पनी पर जुर्माना भी लगा सकेगा। इस रीकॉल पॉलिसी में कम्पनी के रीकॉल करने में कोताही करने पर सजा का भी प्रावधान किया जा रहा है।

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