मायलेज मामले में ईपीए का कड़ा रुख

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अमेरिका की एनवायर्नमेंटल प्रॉटेक्शन एजेंसी ने ऑटो कम्पनियों को कहा है कि वे मायलेज का दावा लैब नहीं बल्कि रोड टेस्ट के बाद ही करें। दिसम्बर 2012 में ह्यूंदे और किया को अपने कुछ मॉडलों का मायलेज बढ़ा-चढ़ाकर बताने के मामले के तूल पकडऩे के बाद बड़ा मुआवजा देना पड़ा था। हाल ही फोर्ड के लिंकन हाइब्रिड सेडान का मायलेज भी कम्पनी के दावे से कम पाया गया है। इसी तरह दक्षिण कोरिया में ह्यूंदे के खिलाफ 1500 सांता फे यूजरों ने मायलेज बढ़ा-चढ़ाकर बताने के मामले में कोर्ट में केस दायर किया है।

कार कम्पनियां आमतौर पर विंड टनल और इसी तरह के अन्य लैब टेस्ट के आधार पर मायलेज का दावा कर देती हैं लेकिन लैब टेस्ट और रोड़ टेस्ट की फ्यूल एफीशियेंसी में बड़े अंतर के कई मामले सामने के बाद अमेरिका की फ्यूल एफीशियेंसी नियामक एजेंसी ईपीए ने कम्पनियों को ये निर्देश दिये हैं। 

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार ईपीए के निदेशक क्रिस गुंडलर ने कहा कि कुछ कम्पनियां अभी भी ऐसा कर रही हैं लेकिन अब ये कानूनन अनिवार्य हो जायेग और रोड टेस्ट के बाद ही कार मेकर मायलेज की घोषणा कर पायेंगे। नये नियम के लागू हो जाने के बाद कार कम्पनियां ज्यादा फ्यूल एफीशियेंसी दिखाने के लिये लैब टेस्ट के नतीजों के साथ भी छेड़छाड़ नहीं कर पायेंगी।

अब फोर्ड फंसी मायलेज के मामले में

ह्यूंदे सांता फे भी फंसी मायलेज के मामले में

लिंकन के पेट्रोल-हाइब्रिड मॉडलों में फोर्ड के मायलेज दावे और हकीकत में अंतर होने को देखते हुये कम्पनी ने हर प्रभावित कस्टमर को 1050 डॉलर तक का मुआवजा देने की बात कही है। 

गुंडलर के अनुसार लैब टेस्ट फॉर्मूला में मामूली फेरबदल करने से ही नतीजों में बड़ा अंतर आ जाता है।

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