महिन्द्रा की स्वीडन की साब को खरीदने की तैयारी

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saabकरीब दो साल तक चले कयासों के बाद अब खबर आ रही है कि महिन्द्रा एंड महिन्द्रा स्वीडन की कार कम्पनी साब को खरीदने की तैयारी में है। साब पर अभी नेशनल इलेक्ट्रिक वेहीकल स्वीडन यानि एनईवीएस का नियंत्रण है और इसी में महिन्द्रा बहुमत हिस्सेदारी खरीदने पर विचार कर रही है। साब पिछले दो-तीन सालों से गिरती बिक्री और वित्तीय संकट से गुजर रही है और ऐसे में माना जा रहा था कि साब शायद बंद हो जायेगी। हालांकि साब, एनईवीएस और महिन्द्रा की ओर से अभी किसी नाम का खुलासा नहीं किया गया है। लेकिन एनईवीएस की ओर से जारी एक बयान के अनुसार एनईवीएस इन दिनों दो कम्पनियों के साथ इस सौदे लिये बात कर रही है। ये दोनों कम्पनियां एशिया की हैं। चर्चा यह भी है कि एनईवीएस ने इस सौदेबाजी को आगे बढ़ाने के लिये इनमें से एक कम्पनी को लेटर ऑफ इंटेंट भी जारी कर दिया है। माना जा रहा है कि ये कम्पनी कोई और नहीं बल्कि महिन्द्रा एंड महिन्द्रा ही है। ऑटोमोटिव न्यूज़ यूरोप ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि एनईवीएस ने जिस कम्पनी को लेटर ऑफ इंटेंट दिया है वो भारत की महिन्द्रा एंड महिन्द्रा ही है।
पहले कई बार सौदेबाजी अधूरी रह जाने के कारण साब इस बात सबकुछ पुख्ता हो जाने के बाद ही कोई घोषणा करना चाहती है और यह पूरा सौदा फरवरी तक हो जाने की उम्मीद जताई जा रही है।
एनईवीएस ने भी कहा है कि वह एशिया की एक ऑटो कम्पनी के साथ मिलकर मॉडल डिजायन करने के लिये एक जॉंइंट वेंचर के लिये चर्चा कर रही है।
मीडिया रिपोर्ट़्स में इस बात के पुख्ता संकेत मिल रहे हैं कि एनईवीएस जिस कम्पनी के साथ बातचीत कर रही है वह महिन्द्रा एंड महिन्द्रा ही है। यानि आने वाले महिनों में सैंगयॉन्ग और पजियट स्कूटर के बाद साब ब्रंाड भी महिन्द्रा के पोर्टफोलियो में शामिल हो जायेगी।
यह पहला मौका नहीं है जब महिन्द्रा एंड महिन्द्रा और साब के बीच सौदेबाजी की चर्चा हो रही है। वर्ष 2012 में भी महिन्द्रा ने साब को खरीदने के लिये दांव लगाया था लेकिन
एनईवीएस में चीन और जापानी निवेशकों की बड़ी हिस्सेदारी है। साब ने 2016 में कार उत्पादन को 1.20 लाख यूनिट्स तक ले जाने का लक्ष्य रखा था। वर्ष 2006 में कम्पनी की का पीक उत्पादन 1.33 लाख यूनिट्स था।
साब को जनरल मोटर्स ने 2010 में नीदरलैंड्स की सुपर स्पोर्ट्स कार कम्पनी स्पाइकर को बेच दिया था। लेकिन स्पाइकर साब ब्रांड को खड़ा करने के लिये जरूरी निवेश नहीं कर पाई थी।

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