बॉटम आउट: अब टॉप गियर की उम्मीद

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SIAM CY2014

साथ में दी गई टेबल को देखें तो सिर्फ एलसीवी अकेला सैगमेंट है जिसमें कैलेंडर वर्ष 2014 के दौरान गिरावट आई। पैसेंजर सैगमेंट में जनवरी से दिसम्बर 2014 के दौरान घरेलू बाजार में 2570531 गाडिय़ों की बिक्री हुई जो कैलेंडर वर्ष 2013 में हुई 2553788 यूनिट्स की बिक्री के मुकाबले 0.66 फीसदी अधिक है। यानि कह सकते हैं कि यह सैगमेंट अब बॉटम आउट हो रहा है और चालू वर्ष के दौरान ज्यादातर मास और लक्जरी सैगमेंट की कम्पनियों के लम्बे लॉन्च लाइनअप के चलते कार और यूवी सैगमेंट को अच्छा फायदा होगा। हालांकि वैन सैगमेंट में अभी किसी खास बदलाव की उम्मीद नहीं है। लेकिन आशंका ये भी है कि एक्साइज ड्यूटी की छूट वापस होने के बाद कम्पनियों के प्राइस बढ़ाने और इकोनॉमी के अभी कमजोर बने रहने से पैसेंजर सैगमेंट को रफ्तार पकडऩे के लिये अभी एक साल इंतजार और करना पड़ सकता है।
मध्यम और भारी ट्रक सैगमेंट मेें पिछले कैलेंडर वर्ष में 181075 गाडिय़ों की बिक्री हुई जो 2013 में हुई 173620 यूनिट्स की बिक्री के मुकाबले 4.29 फीसदी अधिक है। ट्रक सैगमेंट को देश की इकोनॉमी का बैरोमीटर माना जाता है ऐसे में आने वाले महिनों में इकोनॉमी के हालात बेहतर होने के संकेत मिल रहे हैं। हालांकि इस सैगमेंट में बस की बिक्री 17 फीसदी घटी है। एलसीवी सैगमेंट में पैसेंजर और लोडिंग दोनों सबसैगमेंट दबाव में है और इन्हें बॉटम आउट होने में अभी छह महिने और लग सकते हैं।
बेहद कमजोर हालातों में टू-व्हीलर सैगमेंट की परफॉर्मेन्स बहुत अच्छी रही है। हालांकि कुछ राज्यों में मानसून की कमजोरी के कारण बाइक सैगमेंट में वो तेजी नजर नहीं आई जिसकी उम्मीद थी। लेकिन स्कूटर सेल्स 28.89 फीसदी के भारी उछाल के साथ 4326294 यूनिट्स तक पहुंच गई। मॉपेड की बिक्री भी करीब एक वर्ष की कमजोरी के बाद 6.48 फीसदी बढऩे में कामयाब रही है। कैलेंडर वर्ष 2014 में देश में कुल 16013447 टू-व्हीलर की बिक्री हुई जो 2013 में हुई 14358632 यूनिट्स की बिक्री के मुकाबले 11.52 फीसदी अधिक है। थ्री-व्हीलर सैगमेंट में भी 6.03 फीसदी की बढ़त के साथ 531151 गाडिय़ां बिकीं।

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