फोक्सवैगन इंडिया: एंजॉय द इंजीनियरिंग?

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जर्मन महारथी फोक्सवैगन के लिये भारत लास्ट फ्रंटियर साबित हो रहा है। वल्र्ड बेस्ट सेलर पोलो रेंज (पोलो हैचबैक और वेंतो सेडान) रेंज यहां कोई कमाल नहीं दिखा पा रही है और तगड़े मुकाबले में फंसी हुई है। कांटा प्राइस पर फंसा हुआ है और कम्पनी इन दिनों एंजॉय द इंजीनियरिंग केम्पेन चला रही है। कोशिश है कि इंडियन कस्टमर को क्वॉलिटी को लेकर एजुकेट किया जाये। कैसे बाकी मॉडलों की रूफ स्पॉट वेल्ड होती है जबकि पोलो की लेजर वेल्ड…मजबूत भी होती है और फिनिशिंग भी बढिय़ा।
लेकिन अभी चार महिने पहले ही जर्मन इंजीनियरिंग से बनी पोलो यूरो एनकैप क्रेश टेस्ट में बेहद कमजोर साबित हुई थी। हालांकि कम्पनी ने उसके तुरंत बाद पोलो में ड्यूअल एअरबैग को स्टेन्डर्ड फीचर कर दिया।

MonthPoloVentoTotal Salesवल्र्ड मार्केट में फोक्सवैगन 2018 तक सबसे बड़ी कम्पनी बनने का लक्ष्य लेकर चल रही है। चीन में यह सबसे बड़ा कार ब्रांड बनने में कामयाब भी रही है लेकिन भारत में कम्पीटिटिव प्राइस और ईजी टू मेन्टेन कारों का चलन है। इसी को देखते हुये कम्पनी अब बजट कारों की पूरी रेंज लॉन्च कर रही है। फोक्सवैगन इंडिया के ग्रुप हैड महेश कोडुमुडी के अनुसार इनमें हैचबैक, एंट्री सेडान और मिनी एसयूवी तक मास मार्केट के हर सैगमेंट के मॉडल होंगे। 

कम्पनी का मार्केटिंग पिच हमेशा से प्रीमियम क्वॉलिटी और इंजीनियरिंग पर रहा है लेकिन यह पहली बार है जब इसे भारत के बाजार की हकीकत का अंदाजा हो रह है। कोडुमुडी के अनुसार साल के आखिर तक इन मॉडलों के लॉन्च प्लान की घोषणा हो जायेगी।
पोलो और वेंतो में सीमित लोकल कम्पोनेंट होने के कारण बिक्री के मोर्चे पर मात खा जाने के बाद फोक्सवैगन अब नई रेंज में लोकेलाइजेशन बढ़ाने पर भी फोकस कर रही है।
कोडुमुडी कहते हैं कि भारत में कीमत के मोर्चे पर लडऩा बड़ी चुनौती है लेकिन कम्पनी अब इसके लिये तैयार है। लोकेलाइजेशन बढ़ाने से प्राइस कम्पीटिटिव रह पायेगी और मेंटीनेन्स लागत घटेगी।
शुरुआत में कम्पनी भारत में 2018 तक 20 फीसदी मार्केट शेयर हासिल करने का लक्ष्य लेकर चल रही थी लेकिन अब इसे घटाकर 7-8 फीसदी कर दिया है। अभी फोक्सवैगन की बाजार हिस्सेदारी बमुश्किल 1.5 फीसदी है।

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