फस्र्ट टाइम कार बायर से कार बाजार फास्ट ट्रेक पर

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Maruti-Suzuki-WagonR-Duoसरकार बदलने के साथ ही कार बाजार के शायद अच्छे दिन आ गये हैं। अगस्त लगातार चौथा महिना है जब कारों की बिक्री बढ़ी है लेकिन सबसे बड़ी बात ये है कि ये रफ्तार आने वाले महिनों में और तेज होगी क्योंकि फस्र्ट टाइम कार बायर बाजार में करीब डेढ़ साल बाद फिर से सक्रिय हो रहा है। देश के कार बाजार में 70 फीसदी हिस्से पर काबिज मारुति और हुंडई का कहना है कि हाल के महिनों में बिक्री के पटरी पर लौटने का सबसे बड़ा कारण ये फस्र्ट टाइम कार बायर ही है।
चालू वर्ष की पहली यानि अप्रेल-जून की तिमाही में मारुति की बिक्री में फस्र्ट टाइम कार बायर यानि पहली बार कार खरीदने वालों का योगदान 43 फीसदी रहा जबकि पिछले साल यह 39 फीसदी ही था।
इस मूवमेंट का अंदाजा आपको इस बात भी लग सकता है कि जून में वैगन-आर का सेल्स वॉल्यूम रिकॉर्ड 17 हजार यूनिट्स तक पहुंच गया। ऑल्टो भी मार्च में 25590 से बढक़र जून में 30 हजार यूनिट्स तक पहुंच गई थी। अगस्त में इसका बिक्री आंकड़ा 21553 यूनिट्स रहा है।
ह्यूंदे इंडिया के मार्केटिंग वाइस प्रेसिडेंट राकेश श्रीवास्तव कहते हैं एंट्री सैगमेंट साफ बढ़त नजर आ रही है। टू-व्हीलर से अपग्रेड कार खरीदने वालों के साथ ही पुरानी बेचकर नई एंट्री कार खरीदने वालों की मांग बढ़ रही है। एंट्री सैगमेंट में आ रही इस मजबूती का बड़ा कारण ब्याज दरों के साथ ही फ्यूल की कीमतों में में ज्यादा घटत-बढ़त नहीं होना है। श्रीवास्तव कहते हैं कि फस्र्ट टाइम कार बायर के सक्रिय होने से शहरों में ईऑन की और गांवों में आई-10 व सांत्रो की बिक्री बढ़ी है।
कार बाजार में ग्राउंड लेवल पर मजबूती आने के संकेत इस बात से भी मिलते हैं कि मारुति सुजुकी महिने-दर महिने अपने औसत डिस्काउंट में कटौती कर रही है। अप्रेल-जून में मारुति सुजुकी औसत 21 हजार रुपये का डिस्काउंट दे रही थी वहीं जुलाई में यह घटकर 20 हजार रुपये रह गये, अगस्त में इसे घटाकर 18 हजार रुपये कर दिया गया जबकि सितम्बर में औसत डिस्काउंट 16 हजार रुपये ही रह जाने की उम्मीद जताई जा रही है।
पहली तिमाही में एक ओर जहां पैसेंजर गाडिय़ों की बिक्री 4.8 फीसदी घटी वहीं स्मॉल कार स्पेशलिस्ट मारुति सुजुकी को दस फीसदी से भी ज्यादा फायदा हो चुका है।
रूरल मार्केट में भी मारुति सुजुकी की बिक्री पहली तिमाही में 26 फीसदी बढ़ी वहीं शहरों में इसे 13 फीसदी का फायदा हुआ। इससे कम्पनी का मार्केट शेयर 40.4 फीसदी के मुकाबले अप्रेल-जून 2014 में 44 फीसदी हो गया।
शहरी इलाकों में बिक्री के लिहाज से ह्यूंदे को भी फायदा हुआ है।
एंट्री लेवल सैगमेंट का ग्राहक गाड़ी खरीदने के फैसले से पहले फ्यूल प्राइस ट्रेंड पर भी गौर करता है। क्रूड की कीमतों में जिस तेजी से गिरावट आ रही है उससे भी आने वाले महिनों में पेट्रोल और सस्ता होने की उम्मीद जताई जा रही है। जुलाई की शुरुआत में जयपुर में पेट्रोल करीब 77 रुपये लीटर था जो अब घटकर 72 रुपये पर आ गया है। इसी तरह डीजल में सब्सिडी नहीं के बराबर रह गई है यानि इसमें भी आगे बढ़ोतरी की उम्मीद कम ही है। हाल के दिनों में क्रूड 105 से घटकर 93 डॉलर प्रति बैरल तक आ चुका है। रूस पर अमेरिका व यूरोप के आर्थिक प्रतिबंध व ईराक-सीरिया में हिंसा बढऩे के बावजूद क्रूड में यह गिरावट आई है इसका सीधा अर्थ है कि जल्दी इसमें तेजी का दौर आने की संभावना नहीं है।
यानि सस्ते तेल का फायदा कार बाजार खासकर पेट्रोल के दबदबे वाले एंट्री लेवल सैगमेंट को होगा और यह सैगमेंट पूरे कार बाजार को फास्ट ट्रेक पर लाने में मददगार साबित होगा।

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