टोयोटा ईटिओस क्यों हुई राख?

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Etios india

कार में अचानक आग लगने की घटनायें आम हो रही हैं। लेकिन हाल ही में नई दिल्ली में टोयोटा ईटिओस में जो हुआ उससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं। कम्पनी और “जानेमाने” ऑटो एक्स्पर्ट कहते हैं कि आग प्राइवेट मिस्त्रियों द्वारा वायरिंग से छेड़छाड़ करने के चलते हुये शार्ट सर्किट के कारण लगी है। लेकिन आग से गाड़ी की जो हालत हुई है वो मैन्यूफैक्चरिंग डिफेक्ट की ओर इशारा कर रही है।
हादसा 7 मई को दिल्ली के पीथमपुरा में हुआ और इस टोयोटा ईटिओस डीएल12सीडी0618 में सवार 38 साल के कारोबारी अमित मोगा की झुलसकर मौत हो गई थी।
अभी पिछले दिनों ही सडक़ परिवहन मंत्री नितिन गडक़री ने कारों में आग लगने के मामलों पर गौर करते हुये इनकी टाइम बाउंड एक्सपर्ट फोरेंसिक जांच करने के लिये एक सिस्टम तैयार करने की बात कही थी। सबसे बड़ी बात ऐसे हादसों की जांच की स्टेटस रिपोर्ट पर हर महिने उच्च स्तर पर निगाह रखी जायेगी।
जिस टोयोटा ईटिओस में हादसा हुआ वो सिर्फ दो साल पुरानी थी और आईएफटीआरटी यानि इंडियन फाउंडेशन ऑफ ट्रान्सपोर्ट रिसर्च एंड ट्रेनिंग द्वारा की गई जांच में कुछ ऐसे बिंदु सामने आये जो आग लगने के किसी अन्य कारण (मैन्यूफैक्चरिंग डिफेक्ट) की ओर इशारा करते हैं। आईएफटीआरटी की एक्सपर्ट टीम ने दिल्ली के मंगोलपुरी थाने में खड़ी इसी जली हुई कार का मुआयना और गहन जांच की थी। इसमें जो बात सामने निकलकर आई वो ये कि आग के कारण कार के इंजन ब्लॅाक सहित कई अन्य अहम पार्ट्स पिघलकर सिकुड़ गये। टाइम्स ऑफ इंडिया

इस टोयोटा ईटिओस को 12 मार्च 2012 को पश्चिमी दिल्ली स्थित ऑथोराइज्ड डीलर गैलेक्सी टोयोटा से खरीदा गया था। सर्विस रिकॉर्ड के कारण पिछली बार यह गाड़ी रूटीन सर्विस के लिये 8 नवम्बर 2013 को डीलरशिप के सर्विस सेंटर पर आई थी और इसके बाद से यह 11941 किलोमीटर चली थी। इस गाड़ी की सर्विस गैलेक्सी टोयोटा के सर्विस अधिकारी के अनुसार तय शेड्यूल पर ऑथोराइज्ड सर्विस सेंटर पर ही हो रही थी।
आमतौर पर माना जाता है कि आग लगने के ज्यादातर हादसे रिट्रोफिट सीएनजी किट के कारण होते हैं। लेकिन इस मामले में ऐसा भी कुछ नहीं था। इसके अलावा वायरिंग से छेड़छाड़ या एक्सैसरी लगाने से वायरिंग पर ओवरलोड का भी कोई सबूत नहीं मिला।
अमित मोगा के परिवार ने किसी अपराध की आशंका से इनकार किया और यहां तक कि हादसे के समय हाथ में पहना सोने का कड़ा भी सुरक्षित बरामद हुआ जिसे पुलिस ने परिवार को लौटाया।
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार पहली नजर में जो बात सामने आ रही है वो ये है कि गाड़ी में जबरदस्त तरीके से ओवरहीटिंग हुई जिससे डैशबोर्ड के नीचे मौजूदा वायरिंग हारनैस पर लोड़ बढ़ा और वह सुलग गई। ऐसा तभी होता है जब गाड़ी में कोई बड़ी मैन्यूफैक्चरिंग और मैकेनिकल गड़बड़ी हो।
इससे पहले 13 अप्रेल 2013 को भी एक होन्डा सिविक में आग लगी थी जिसमें ड्राइवर की मौत हो गई थी। यह कार खुद होन्डा कार इंडिया की थी ऐसे में वायरिंग के साथ छेड़छाड़ यानि फालतू एक्सैसरी लगाने की संभावना भी खत्म हो जाती है।
इस तरह कार में अचानक आग लगने के मामलों की विशेष जांच के लिये आईएफटीआरटी ने सरकार से अपील की है। नितिन गडक़री ने इन हादसों को गंभीरता से लेकर जांच के लिये सिस्टम डिजायन करने की बात कही है।

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