जेडी पावर: टोयोटा अव्वल, मारुति दूसरे पायदान पर

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jd power ssiजेडी पावर की सेल्स सेटिस्फैक्शन स्टडी में टोयोटा किर्लोस्कर ने पहला स्थान हासिल किया है वहीं देश की सबसे बड़ी कार कम्पनी मारुति सुजुकी दूसरे पायदान पर रही है। यह स्टडी सितम्बर 13 से अप्रेल 14 के बीच खरीदी गई नई गाडिय़ों पर की गई थी और इसमें मास सैगमेंट के 71 मॉडलों को शामिल कर 8 हजार ग्राहकों से फीडबैक लिया गया था। स्टडी के नतीजों के अनुसार नई गाडिय़ों के ऐसे ग्राहकों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है जो डीलर की साख और उसके काम करने के तरीके को ध्यान में रखकर गाड़ी खरीदने का फैसला कर रहे हैं। स्टडी में यह सामने आया कि किसी खास डीलर से गाड़ी खरीदने के फैसले में डीलर की साख की अहमियत तेजी से बढ़ रही है और पांच वर्ष मेंं इसमें 11 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा जल्दी डिलिवरी, पसंद के मॉडल और वैरियेंट का मिलना और मोलभाव में सुविधा आदि मुद्दों का महत्व भी तेजी से बढ़ रहा है।
स्टडी के नतीजों में कहा गया है कि जिन ग्राहकों ने साख, पसंद का मॉडल मिलना और मोलभाव में ज्यादा परेशानी आदि के आधार पर डीलर का चुनाव किया उन्होंने लोकेशन और बेस्ट डील आदि के आधार पर डीलर चुनने वाले ग्राहकों की बजाय औसत 4 फीसदी ज्यादा पैसे खर्च किये।
जेडी पावर सेल्स सेटिस्फैक्शन स्टडी 2014 में टोयोटा को एक हजार अंकोंं के बेंचमार्क पर 866 अंक हासिल किये वहीं मारुति सुजुकी 860 अंक के साथ दूसरे स्थान पर रही। महिन्द्रा, होन्डा और ह्यूंदे में 859 अंक के साथ टाई हुआ। यानि सेल्स सेटिस्फेक्शन के लिहाज से इनकी परफॉर्मेन्स बिल्कुल एक जैसी पाई गई।
इस बेंचमार्क पर मास मार्केट सैगमेंट का औसत स्कोर 857 अंक रहा। सेल्स सेटिस्फेक्शन के लिहाज से टाटा मोटर्स की परफॉर्मेन्स स्कोडा, रेनो, निसान, फोक्सवैगन, फोर्ड, शेवरले और फिएट से बेहतर रही और इसका स्कोर 847 अंक रहा। इस रैंकिंग में 833 अंक के स्कोर के साथ शेवरले और फिएट में टाई हुआ और ये दोनों कम्पनियां आखिरी पायदान पर रहीं।
जेडी पावर एशिया पैसिफिक भारत में 15 सालों से यह स्टडी कर रह है। इसमें डिलिवरी प्रॉसेस, डिलिवरी टाइमिंग, सेल्सपर्सन के व्यवहार, सेल्स इनीशियेशन, डीलर फैसिलिटी, कागजी कार्यवाही और डील आदि सात मुद्दों के आधार पर कम्पनियों को स्कोर दिये गये हैं।
स्टडी में यह भी सामने आया कि नई गाड़ी के 29 फीसदी ग्राहकों ने इंटरनेट का इस्तेमाल किया और इनमेंं से 52 फीसदी ने निर्माता कम्पनी और 40 फीसदी ने ऑटो पोर्टल का सहारा लिया।

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