क्या होगा इन बाइक्स का?

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होन्डा मोटरसाइकल निओ रेंज पर 2015 रुपये का डिस्काउंट दे रही है, हीरो मोटोकोर्प ने भी एचएफ रेंज पर 6.99 फीसदी की सस्ती फायनेन्स स्कीम शुरू की है। बजाज ऑटो ने एंट्री लेवल सैगमेंट में हाल ही प्लेटिना ईएस और सीटी100 को लॉन्च किया है। टू-व्हीलर बाजार में कैश डिस्काउंट और रियायती फायनेन्स का यह दौर कोई पांच साल बाद शुरू हुआ है। इससे पहले 2008-09 की मंदी में कम्पनियों ने थोड़े दिनों के लिये डिस्काउंट दिये थे। अब सवाल है कि ये आखिर हो क्यों रहा है। 

यदि अगस्त 2014 से जनवरी 2015 के बीच के छह महिनों में बाइक्स की सेल्स को देखा जाये तो अक्टूबर से जनवरी तक लगातार चार महिनों में यह गिरी है। 
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इन छह महिनों में बजाज ऑटो को भी लगातार नुकसान हुआ है और सेल्स सितम्बर में 2.25 लाख के पीक लेवल से गिरकर दिसम्बर में 1.23 लाख यूनिट्स रह गई। हालांकि जनवरी2015 में थोड़े सुधार के साथ कम्पनी ने 145744 यूनिट्स की बिक्री हुई।
बाजार के जानकार कहते हैं कि बाइक सैगमेंट खासकर एंट्री लेवल बाइक्स पिछले छह महिने से बहुत दबाव में है और रूरल मार्केट में बिक्री बुरी तरह प्रभावित हुई है।
इक्रा की हाल ही आई रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्तीय वर्ष 2014-15 का अंत तो 8-9 परसेंट ग्रोथ के साथ हो जायेगा लेकिन असली हालात अगले साल सामने आयेंगे और बिक्री बमुश्किल 1 से 3 फीसदी ही बढ़ेगी। इक्रा का मानना है कि इसका बड़ा कारण देर से आये मानसून के कारण रबी की फसल कमजोर होना है इसके अलावा फसल लागत में बढ़ोतरी और जिन्स की कीमतों में कमजोरी ग्रामीण भारत में खर्च करने लायक आमदनी घटी है और इसका असर एंट्री लेवल बाइक्स की बिक्री पर पड़ा है।
रिपोर्ट के अनुसार देश की अर्थव्यवस्था में अभी स्थिरता और मजबूती के संकेत नहीं मिल रहे हैं और इस कारण फस्र्ट टाइम बायर अपनी खरीद को टाल रहा है हालांकि रिप्लेसमेंट डिमांड बनी हुई है।
अच्छे फेस्टिव सीजन की उम्मीद में कम्पनियों ने अगस्त और सितम्बर में डीलर के यहां अच्छा खासा स्टॉक जमा किया था और जो सियाम के आंकड़ों में भी नजर आता है। लेकिन फेस्टिव सीजन पर उम्मीद से कम डिमांड निकली और अक्टूबर में सेल्स में 8.73 फीसदी की कमी आई। गिरावट का यह दौर नवम्बर, दिसम्बर और जनवरी में भी साफ नजर आता है। इसका सीधा अर्थ है कि फेस्टिव सीजन में डीलरों के यहां जमा हुआ स्टॉक निपटा नहीं है।
हीरो मोटोकोर्प के प्रवक्ता भी स्वीकार करते हुये कहते हैं कि डीलर के यहां स्टॉक बढ़ा है। मनरेगा बजट कम करने, फसल आय घटने और मजदूरी में कमी आने से रूरल इंडिया में कंज्यूमर सेंटिमेंट कमजोर पड़ा है और बिहार, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र व उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में बिक्री घटी है।

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