कार बाजार में कन्फ्यूजन के हालात

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mayमई मेंं फोक्सवैगन ने 57 फीसदी की छलांग लगाई। मारुति और टाटा की सेल्स ग्रोथ अच्छी रही वहीं होन्डा और ह्यूंदे की बेहद मामूली। महिन्द्रा, टोयोटा और फोर्ड को घाटा उठाना पड़ा।
पैसेंजर वेहीकल सैगमेंट के इन हालातों का कोई साफ कारण नजर नहीं आ रहा है। बाजार के जानकार कहते हैं कि रूरल मार्केट में भारी दबाव है लेकिन इस पर भरोसा किया जाये तो मारुति और टाटा की बिक्री क्यों बढ़ी। दूसरा कारण यह बताया जा रहा है कि जिन कम्पनियों ने हाल में नये मॉडल लॉन्च किये उनकी बिक्री बढ़ी है। लेकिन 10 महिने पहले होन्डा ने मोबिलिओ को और ह्यूंदे ने इलीट आई-20 को। एक्सेंट को आये भी 14 महिने ही हुये हैं। अभी तीन महिने पहले नई वरना भी आई है फिर भी कम्पनी को ज्यादा फायदा क्यों नहीं मिल पाया।
अप्रेल में ग्रोथ दर्ज करने के बाद महिन्द्रा को मई में फिर नुकसान उठाना पड़ा और बिक्री 7 फीसदी गिरी।
इकोनॉमी के हालात बेहतर होने का फायदा टोयोटा को मिलना चाहिये था लेकिन मई में कम्पनी की घरेलू बिक्री 2 फीसदी घटी है। नया मॉडल लाने की तैयारी कर रही फोर्ड की सेल्स मई में 22 फीसदी घटकर 4726 यूनिट्स रह गई। मारुति को कॉम्पेक्ट को छोडक़र सभी सैगमेंट्स में फायदा हुआ है। ऑल्टो और वैगन-आर वाले मिनी सैगमेंट में सेल्स में 20.6 फीसद की बढ़त दिख रही है लेकिन महिने-दर-महिने देखें तो 35 हजार यूनिट्स के औसत स्तर पर ही है। पुरानी पीढ़ी की डिज़ायर की टेक्सी ब्रांडिंग का दांव मारुति के सही पड़ता लग रहा है। इसकी सेल्स में लगातार बढ़ोतरी हो रही है और मार्च में डिज़ायर टूर का वॉल्यूम 3190 यूनिट्स तक पहुंच गया।
पिछले 15 महिने में तीन मॉडल पेश करने के बावजूद ह् यूंदे को कोई फायदा हाता नजर नहीं आ रहा है। कम्पनी ने पिछले साल मई में 36205 गाडिय़ां बेचीं थीं जो मई 2015 में 3.4 फीसदी की मामूली बढ़ोतरी के साथ 37450 यूनिट्स तक पहुंच पाई। ह्यूंदे इंडिया के सेल्स और मार्केटिंग वाइस प्रेसिडेंट राकेश श्रीवास्तव के अनुसार नये मॉडल बिक रहे हैं, रूरल मार्केट बहुत दबाव में है। हालांकि कम्पनी की रूरल सेल्स बढ़ रही है लेकिन कुल बिक्री में इसका योगदान बढ़ नहीं पा रहा है।
डेलॉय इंडिया के कुमार कंडास्वामी के अनुसार रूरल मार्केट में मंदी का असर कम्पनियों की कुल बिक्री पर पड़ेगा हालांकि इससे सबसे ज्यादा प्रभावित एंट्री लेवल हैचबैक और एंट्री लेवल बाइक्स होंगी।
नये मॉडल की कमी और रूरल इकोनॉमी की कमजोरी महिन्द्रा पर भारी पड़ रही है। मई में कम्पनी के पैसेंजर वेहीकल मॉडल्स की कुल 18135 यूनिट्स की बिक्री हुई जो 7 फीसदी कम है।
ज़ेस्ट और बोल्ट के बाद जेनेक्स नैनो लाने का फायदा कम्पनी की बिक्री में साफ नजर आ रहा है। कम्पनी की कार सैगमेंट की बिक्री 32 फीसदी के अच्छे खासे उछाल के साथ 9176 यूनिट्स रही लेकिन सूमो-सफारी-आरिया की बिक्री 15 फीसदी गिरकर 1962 यूनिट्स ही रह गई।
होन्डा कार इंडिया ने मई में 13431 गाडिय़ां बेचीं जो सिर्फ 1 फीसदी ज्यादा है।
टू-व्हीलर सैगमेंट के हालात विकट नजर आ रहे हैं। हीरो मोटोकोर्प की बिक्री 5.41 फीसदी गिरकर 5.69 लाख यूनिट्स रही। होन्डा 2-व्हीलर का कुल वॉल्यूम को 3 फीसदी बढ़ा है लेकिन बाइक्स की बिक्री 9.54 फीसदी घटकर 1.38 लाख यूनिट्स ही रह गई। हालांकि टीवीएस को बाइक सैगमेंट में भी फायदा हुआ है और सेल्स 8 फीसदी बढक़र 91344 यूनिट्स रही।

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