कमजोर क्यों हैं कार बाजार के हालात

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June Companies13 महिने यानि नई सरकार के आने के साथ शुरू हुआ तेजी के दौर को जून में ब्रेक लगते महसूस हो रहे हैं। मानसून को लेकर पैदा हुई आशंका को एक कारण बताया जा रहा है। पेट्रोल-डीजल के बीच अंतर 9-10 रुपये रह गया है इसका फायदा पेट्रोल मॉडलोंं को मिलना चाहिये था लेकिन मारुति की ऑल्टो-वैगनआर वाले मिनी सैगमेंट में सेल्स 27 फीसदी गिरी है। जो फस्र्ट टायर बायर के मन में पैदा हुई आशंका की ओर इशारा कर रही है। यदि फस्र्ट टाइम बायर यानि अपने जीवन की पहली कार खरीदने वाला बाजार से किनारा करता है तो कार सैगमेंट को फिर से रिवर्स गियर लग सकता है। मारुति ने जून में 102626 गाडिय़ां बेचीं जो पिछले साल जून में हुई 100964 यूनिट्स की बिक्री के मुकाबले सिर्फ 1.8 फीसदी ही अधिक है। जबकि पिछले एक साल में मारुति स्विफ्ट, डिज़ायर और ऑल्टो के-10 के फेसलिफ्ट लॉन्च करने के साथ मिड सेडान सैगमेंट में सियाज़ पेश कर चुकी है। इसके अलावा सेलेरियो का डीजल वैरियेंट भी बाजार में आया है। ह्यूंदे के आंकड़े फिर भी थोड़ा भरोसा जगाते हैं। कम्पनी ने जून में 36300 गाडिय़ां बेचीं जो पिछले साल जून में हुई 33514 यूनिट्स की सेल्स के मुकाबले 8.3 फीसदी अधिक है। मारुति और ह्यूंदे जुलाई में ही एस-क्रॉस और क्रीटा के नाम से नये मॉडल पेश कर रही हैं। इन कॉम्पेक्ट अर्बन एसयूवी मॉडलों के जरिये ये दोनों कम्पनियां पहली बार नये सैगमेंट में कदम रख रही हैं। महिन्द्रा लगातार रिवर्स गियर में चल रही है और जून में कम्पनी को पैसेंजर सैगमेंट में बिक्री के लिहाज से 15 फीसदी का घाटा हुआ है। पुराने पड़ते मॉडलों के कारण टोयोटा भी कमजोर पड़ रही है और जून में कम्पनी की बिक्री 12.87 फीसदी घटकर 19464 यूनिट्स रह गई। सिटी और अमेज़ होन्डा के लिये जैकपॉट साबित हो रहे हैं और कम्पनी जून में तीसरे पायदान पर रही। होन्डा की जून में सेल्स 13 फीसदी बढक़र 18380 यूनिट्स रही और इस तरह यह महिन्द्रा को पीछे छोड़ते हुये मारुति और ह्यूंदे के बाद तीसरी सबसे बड़ी कार कम्पनी बन गई। हालांकि आने वाले महिनों में महिन्द्रा नये मॉडलों की पूरी रेंज लॉन्च कर रही है ऐसे में तीसरे पायदान का मुकाबला बड़ा रोमांचक रहने की उम्मीद है। बोल्ट और ज़ेस्ट से टाटा जो उम्मीद कर रही थी वो पूरी होती नहीं लग रही है। लॉन्च के बाद से ज़ेस्ट का वॉल्यूम घटकर आधा रह गया है। वहीं बोल्ट बुरी तरह फिसल रही है। कम्पनी ने जून में सिर्फ 10281 गाडिय़ां बेचीं हालांकि पिछल साल जून के लो बेस के कारण 30 फीसदी की ग्रोथ नजर आ रही है। फोक्सवैगन भारत में करवट लेने के संकेत दे रही है और लगातार कई महिनों से कम्पनी की सेल्स बढ़ रही है। जून में फोक्सवैगन ने 4039 यूनिट्स बेचीं जो 31 फीसदी ज्यादा है। हालांकि इसमें नई वेंतो के शुरूआती डिस्पैच का भी योगदान है। फोर्ड और जीएम लगातार सिकुड़ रही हैं। फोर्ड अगले कुछ महिनों में एस्पायर और इसका हैचबैक वैरियेंट लॉन्च करेगी। वहीं जीएम टॉप एंड ट्रेलब्लेज़र को लॉन्च कर रही है। अगल वर्ष आने वाली एमपीवी स्पिन से जीएम को थोड़ा फायदा हो सकता है। रेटिंग एजेंसी मूडीज़ का मानना है कि यदि मानसून की कमजोर रहने की आशंका सही साबित होती है या फिर पिछले साल की तरह यह देर से सक्रिय होता है तो रूरल इकोनॉमी को बड़ा नुकसान होगा और इसका असर ऑटो इंडस्ट्री पर भी दिखेगा।

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