ऑल्टो-इऑन की सुस्ती कार सेल्स पर पड़ी भारी

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June SIAM 2015जून में कार सेल्स आठ महिने बाद फिर गिरी। यूवी और वैन सैगमेंट तो लगातार घाटे में हैं ही अब ऑल्टो और इऑन वाला मिनी कार सैगमेंट भी कम्पनियों के लिये चिंता का कारण बन रहा है और इसका असर पूरे पैसेंजर वेहीकल सैगमेंट के वॉल्यूम पर पड़ रहा है। जून में का 162677 कारों की बिक्री हुई जो पिछले वर्ष जून के लो बेस के मुकाबले सिर्फ 1.53 फीसदी अधिक है। लेकिन कमर्शियल वेहीकल्स खासकर मध्यम और भारी ट्रक-बस का वॉल्यूम लगातार पॉजिटिव बना हुआ है। बाइक्स भी 9 महिने बाद सब-ज़ीरो लेवल से ऊपर आई है हालांकि ग्रोथ रेट नहीं के बराबर 0.05 फीसदी ही रही है। स्कूटर में बम्पर सेल्स का सालों से चल रहा दौर अब सुस्त पडऩे के संकेत दे रहा है।
कार सैगमेंट में ऑल्टो,वैगन-आर और इऑन वाले मिनी सैगमेंट में सेल्स बुरी तरह गिरी है। ऑल्टो और वैगन-आर की बिक्री में मारुति को 30.7 फीसदी का नुकसान हुआ है और घाटा करीब साढ़े नौ हजार यूनिट्स का है। पिछले वर्ष जून में 30449 ऑल्टो-वैगनआर बिकी थीं लेकिन जून 2015 में यह घटकर 21115 यूनिट्स ही रह गई। ह्यूंदे इऑन की बिक्री भी 19.7 फीसदी घटी है और यह 6579 के मुकाबले घटकर 5313 यूनिट्स पर आ गई।
हालांकि सियाम का मानना है कि चिंता की कोई बात नहीं है। कार कम्पनियों में जून में सप्ताह भर तक चले ब्लॉक क्लोज़र के कारण उत्पादन नहीं हो पाया और यही जून के आंकड़ों में नजर आ रहा है।
हालांकि ऑटो एनेलिस्ट्स का मानना है कि इकोनॉमी को लेकर जो सवाल तीन साल से बने हुये हैं उनका जबाव नहीं मिल पाया है और इसके चलते ऑटो सेल्स ग्रोथ का दौर जम नहीं पा रहा है। रूरल इकोनॉमी खास चिंता का कारण है और इसके कारण स्मॉल कार, एलसीवी और बाइक्स की बिक्री बढ़ नहीं पा रही है।
सियाम के अध्यक्ष विक्रम किर्लोस्कर का मानना है कि कमजोर मॉनसून ऑटो इंडस्ट्री के लिये चिंता का बड़ा कारण है।
डेलॉय टच तोहामात्सु के कुमार कंडास्वामी कहते हैं कि मॉनसून की शुरूआत से पहले जो आशंका जताई जा रही थी हालात उससे बेहतर हैं। इससे रूरल डिमांड में सुधार आना चाहिये। नये मॉडल लॉन्च से फेस्टिव सीजन में कस्टमर को बाजार में खींचकर लाने में मदद मिलेगी।

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