एबीएस जरूरी हो गया ट्रक-बस में

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भारत सरकार ने 1 अप्रेल से बिकने वाले कमर्शियल वाहनों ट्रक-बस में एबीएस यानि एंटी लॉक ब्रेकिंग सिस्टम जरूरी कर दिया है। ऑटोकार प्रॉफेशनल की रिपोर्ट के अनुसार शुरूआत में एन3 कैटेगरी (12 टन ग्रॉस वेहीकल वेट से ज्यादा) वाले ट्रक और एम3 (5 टन ग्रॉस वेहीकल वेट और 9 सवारी से ज्यादा) कैटेगरी वाली बसों में एबीएस को अनिवार्य किया गया है। इन कैटेगरी के के वाहनों में प्रॉडक्शन के समय ही एबीएस लगाया जायेगा। सियाम के कार्यकारी निदेशक टेक्निकल के के गांधी के अनुसार पहले ट्रेक्टर-ट्रेलर के ट्रेक्टर, मल्टी एक्सल, हाई एंड वाहन और ऑल इंडिया टूरिस्ट बसोंं में ही एबीएस अनिवार्य था लेकिन अब सेंट्रल मोटर वेहीकल रूल्स के प्रावधानों के तहत जारी अधिसूचना में इसे सभी कमर्शियल वाहनों के लिये जरूरी कर दिया गया है जिसे चरणबद्ध रूप से लागू किया जायेगा। गांधी के अनुसार एबीएस उन सडक़ों पर कमर्शियल वेहीकल्स में विशेष रूप से फायदेमंद होगा जहां स्लिप होने या व्हील लॉक हो जाने की आशंका बहुत रहती है।
एबीएस सिस्टम व्हील को लॉक होने से रोकता है और अचानक ब्रेक लगाने पर या फिसलन भरे रास्तों में गाड़ी को स्किड होने से बचाता है। इस तरह देश में सडक़ सुरक्षा के हालात बेहतर होंगे और हादसों में कमी आयेगी।
देश में एबीएस सिस्टम बनाने वाली बड़ी कम्पनी वैबको के एमडी पी कनलप्पन के अनुसार सडक़ हादसों में करीब 30 फीसदी कमर्शियल वेहीकल्स के कारण होते हैं।
एबीएस अनिवार्य करने से शुरूआत में गाडिय़ों की कीमत 15 से 20 हजार रुपये बढ़ जायेगी लेकिन जैसे-जैसे डिमांड और सप्लाई बढ़ेगी एबीएस की उत्पादन लागत में कमी आयेगी जिसका फायदा वाहन निर्माता कम्पनियों को मिलेगा।
भारत में अभी ए3 और ए3 कैटेगरी के हर वर्ष करीब ढाई लाख कमर्शियल वेहीकल बिकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार भारत में 78 फीसदी सडक़ हादसे गलत तरीके से ड्राइविंग के कारण होते हैं और 32 फीसदी मामलों में ट्रक-बस शामिल होते हैं।

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